सुट्टे की बीज से।

Avishek Sahu
August 22, 2018

सुट्टे की बीज से कभी तन्दरूस्ती निकालो तो पता चलेगा तन्दरूस्ती तो बीमारी है,

जिस बीमारी के चलते सैकड़ों लोग उस फरिश्ते के आभारी हैं,

जिस फरिश्ते ने सिखाया बंदूक तो एक छोटी सी ख्वाहिश है,

ख्वाहिश है पर बस ख्वाहिश नहीं ज़र्रे ज़र्रे की नुमाइश है

जिस नुमाइश के आगे चलाने वाले हर रोज़ झुकते हैं

अब झुकते हैं तो झुकते हैं इससे सब थोड़ी ना बिकते हैं

 

इसी लिए वो कहता गया बंदूक छोड़ो अकल से गोली मारो

अकल गई तेल लेने तो दिल से ही दे मारो,

अब ये मत बोलना दिल भी आज कल दिल्ली में सोती है,

अब सोती है तो सोती है कहां दिन भर रोती है,

रोती होती तो पता चलता बंदूक तो एक बीमारी है

जिस बीमारी को लेके आज कल हर कोई आभारी है

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