ब्लेड है तकदीर नहीं।

Avishek Sahu
August 23, 2018

ब्लेड है तकदीर नहीं जो हाथ से फिसल जाए,

पकड़ो उस गुणवान धनी को जो तकदीर मसल आए,

अरे तकदीर बनी थी पिस्तौल की छबि, फट से अंदर तक हो आए,

अब इसमें क्या संकोच है इतनी, के गुणवान अंदर ना हो आए,

अब अंदर की बात बस अंदर की नहीं है, ये तो बात है अंदरूनी की,

जो यूहीं बस झट से नाच उठे, जब जान हो बन आने की,

जाओ उस शक्स से पूछो जो गया था फरमाने,

बाप था मेरा दोस्त नहीं जो ना आऊं में लगवाने,

अब लगवाने जब आ ही गया हूं, थोड़ा लेलो ज़रा भड़काके,

और बोला बस हिसाब क्या हुआ, वो जो है बैठी खड़काके।

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